तेरी हर  बात  पर   हम  ऐतबार   करते   रहे
तुम हमें  छलते रहे,हम तुमसे प्यार करते रहे ।

कोशिशें करते तो मंज़िल ज़रूर मिल जातीं 
मगर अफ़सोस तुम वायदे  हज़ार करते रहे ।


नाम उनको भी मेरा  याद तलक नहीं आया 
जिनकी हस्ती हम ख़ुद मे शुमार करते रहे ।


मुझको मालूम था तुम नहीं आओगे फिर भी
ज़िंदा उम्मीद लिये हम इन्तिज़ार करते रहे ।


ज़िन्दगी यूँ तो गुज़र रही है पहले की तरह
पर ज़ख़्म पिछले कुछ ज़ीस्त ख्वार करते रहे ।


एक घर में कहकहे और शहनाई की आवाज़
'दीपक' अरमान मेरा बस तार - तार करते रहे

@दीपक शर्मा 

5 comments:

  1. वाह ! बेहतरीन ख्यालात

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  2. सुन्दर रचना...

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  3. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 26-06-2014 को चर्चा मंच पर चर्चा -1655 में दिया गया है
    आभार

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  4. ............. बेहतरीन ख्यालात

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