नकली सूरज 
नकली सुबह 
तभी तो अब न मुर्गा बांग देता है 
न घर में उठने की सुगबुगाहट होती है !
साँसों का सन्नाटा समय से परे बना रहता है 
सब थके हैं .... जाने कब जागेंगे !!!


रश्मि प्रभा 
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"चीख लेने दो मुझे 
रात लम्बी है 
और सर्द बेहद 
सबेरा होगा --लोग कहते हैं 
यकीन नहीं होता
यूं भी दिनमान पर कोहरे का कहर जारी है 
ओस खामोश है फूलों के रुखसारों पर 
खून की बूँद नज़र आती हैं कुछ खारों पर 
और तारों ने भी तहजीब की चुप्पी साधी 
रात को देर गए दहशत दस्तक दे रही दरवाजों पर
सबेरा होगा --लोग कहते हैं 
यकीन नहीं होता
रात लम्बी है 
चीख लेने दो मुझे ." 




----राजीव चतुर्वेदी

7 comments:

  1. चीख एकान्त को भेद जाती है..लम्बी रात हो तो और भी।

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  2. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति मंगलवार के चर्चा मंच पर ।।

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  3. वाह! बहुत सुंदर।

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  4. तभी तो अब न मुर्गा बांग देता है
    न घर में उठने की सुगबुगाहट होती है !SACH MUCH




    यकीन नहीं होता
    रात लम्बी है
    चीख लेने दो मुझे ."BAHUT SUNDAR

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  5. लंबी रात में एकांत में किसी की चीख बहुत दूर सुनाई देती है मन को छूती रचना |
    आशा

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