हाउसवाइफ किसे कहते हैं ?
 घर को घर बनाये 
कभी न थके 
गर हो तो ज़िक्र ना करे 
थकान जब बीमारी बन जाये तो नसीहतें सुने 
इसकी उसकी काबिलियत के किस्सों से 
बिछावन से उठ जाये 
बच्चे पिता के खानदान को उजागर करें 
गलती हो तो हाउसवाइफ़ की कमजोरी 
उसके परिवार की गलती !!!
और आप समझते हैं -  हाउसवाइफ यानी मुफ्त की गुलाम 
जो आराम फरमाती है सारे दिन :)



रश्मि प्रभा 
================================================================

एक ऐसा नाम
जिसमे काम की कोई समय अवधि
नहीं होती ,ये ATM जैसा काम करती है ,
उसके काम को हमेशा फ़र्ज़ का जामा
पहनाया जाता है ,
इस काम मे बीमारी की कोई
गुंजाईश नहीं होती ,
और गलती तो आप कर ही
नहीं सकते ,
फिर भी इस काम को आदर से
नहीं नवाज़ा जाता ,
बहुत से लोग इसलिए आजकल
homemaker भी बोल लेते हैं ,
इस चाह मे की शायद कोई
फर्क पड़ जाये ,
और मज़े की बात है
उसे घर मे लाने  से पहले
पूरी तरह जाँचा परखा भी जाता है ,
ऐसे लोगों को हाउसवाइफ कहा जाता है/

My Photo



रेवा

19 comments:

  1. हाउसवाइफ सिर्फ़ प्यार, सम्मान और थोड़ी सी care चाहती है.... अगर ये देना भी उसके परिवार को भारी पड़ जाए ... तो बहुत दुख होता है...
    ~सादर!!!

    ReplyDelete
  2. बड़ी-बड़ी बातों के बावजूद भी housewife लगभग नकारा ही समझी जाती है ....पूरी उम्र इसी टीस को जीना मानो नीति सी है ...खूबसूरत कविता ।

    ReplyDelete
  3. अति सुंदर कृति
    ---
    नवीनतम प्रविष्टी: गुलाबी कोंपलें

    ReplyDelete
  4. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 19/01/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

    ReplyDelete
  5. sahi kaha didi apne.....shukriya didi meri post ko vatvrich mey shamil karne kay liyee...

    ReplyDelete
  6. अधिकारों की बात नहीं
    बस कर्तब्‍य तुम्‍हारे हैं
    हाउसवाइफ हो तुम

    ReplyDelete
  7. bahut khoob..house wife hona aasan bhi nahi..

    ReplyDelete
  8. fir bhi ......housewife hona gourav ki baat hai,jise nakara nahin ja sakta.

    ReplyDelete
  9. बस किसे कहते हैं इतना समझ आ जाये तो बात ही क्या है

    ReplyDelete
  10. अधिकतम उत्तरदायित्वबोधग्रस्त..

    ReplyDelete
  11. हाउस वाइफ को परिभाषित करती
    अनूठी रचना.वाह रेवाजी !सुन्दर रचना को पढवाने के लिए रश्मि प्रभाजी का आभार !
    New post कुछ पता नहीं !!! (द्वितीय भाग )
    New post: कुछ पता नहीं !!!

    ReplyDelete
  12. कर्तव्य हमारे
    अधिकार तुम्हारे
    घर चलता है इसी तर्ज़ पर
    हॉउस वाइफ दवा है हर मर्ज़ की
    पर निर्णय ना नहीं
    वो गृहणी नहीं गृहस्वामी लेगा ----बहुत सार्थक पोस्ट

    ReplyDelete
  13. सुबह से शाम तक ये बिजी हैं,
    कौन कहता है कि housewife बनना इजी है?

    ReplyDelete
  14. दोनों रचनाएँ बहुत प्रभावशाली

    ReplyDelete
  15. सही बात।।
    सटीक रचना।।।।
    :-)

    ReplyDelete
  16. गहरी .. सटीक ...
    सच मिएँ सच के करीब पर पुरुष के लिए बगलें झाँकने को मजबूर कर दे ...

    ReplyDelete
  17. सटीक .... सुंदर प्रस्तुति

    ReplyDelete
  18. हॉउस वाईफ है सब जानती है थोड़ी तारीफ कर दो 102 डिग्री बुखार में भी खाना बनाने में जुट जाएगी ।
    हम जब गृहविज्ञान पढ़ते थे स्कूल में तब" गृहणी के कर्तव्य" पढाये जाते थे हलाकि दिन रात घर में माँ को वाही प्रेक्टिकल करते देखते थे ।

    ReplyDelete

 
Top