हमने कई रास्ते बनाये 
चलो तो सही ...

रश्मि प्रभा 



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(1) 
अधिकार मिले अति भाग खिले, नहिं दम्भ दिखे प्रण आज करो
करना  नहिं  शासन  ताकत से , दिल पे  दिल से बस राज करो
कब  कौन  कहाँ  बिछड़े बिसरे , लघु कौन यहाँ ,गुरु कौन यहाँ
उसकी  फुँकनी  सुर  साज  रही ,  वरना  हर साज त मौन यहाँ ||

(2) 
प्रण  आज  करो  सब  एक  रहें    ,   नहिं  भेद  रहे   तुझमें  मुझमें
उसके  शुभ  अंश  बँटे  सब में     ,   जल में  थल में    इसमें  उसमें
दिन  चार  मिले  कट तीन गये    ,   बस  एक बचा बरबाद न हो
किस काम क जीवन हाय सखे, यदि जीवन में मधु स्वाद न हो ||

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अरुण कुमार निगम

8 comments:

  1. सुन्दर आहवान

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  2. ऐसे ही इस संकल्प की डोर में एक एक गाँठ लगा कर हम इसको बहुत मजबूत बनाने के लिए तैयार है और इससे ही हमारी शक्ति का अहसास करा देंगे।

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  3. सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    मकरसंक्रान्ति की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  4. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार 15/1/13 को चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका वहां हार्दिक स्वागत है

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  5. अत्यन्त प्रभावी अभिव्यक्ति...कई बार पढ़ने योग्य..

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  6. बहुत सुंदर, उम्दा प्रभावी प्रस्तुति,,,

    recent post: मातृभूमि,

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