बीनू भटनागर की दो कविताएँ बीनू भटनागर की दो कविताएँ

पद-चिन्ह ये पदचिन्ह , नई नवेली दुल्हन के से , मुझको तो लगते हैं। जिस दिन मेरी पुत्रवधु ने , पलक झुकाये , झीने से घूँघट मे ...

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11:38 AM

वटवृक्ष के हिंदी ब्लॉग दशक पर केन्द्रित अंक का लोकार्पण वटवृक्ष के हिंदी ब्लॉग दशक पर केन्द्रित अंक का लोकार्पण

"27 अगस्त 2012 हिंदी ब्लोगिंग के इतिहास में एक ऐसे दिन के रूप में याद किया जाएगा, जिसकी यादें युग-युगांतर तक शायद ही मिट पाए । यही ...

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12:18 PM

  बुढ़ापा बुढ़ापा

                     मानवता की असली पहचान उसका दूसरों के साथ प्रेम , सदभावना व आत्मीयता से व्यवहार करना है l परन्तु जब बात बुजुर्गों की...

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10:33 AM

थोड़ा वक्त तो लगेगा ही ! थोड़ा वक्त तो लगेगा ही !

अब- हमें लौटना होगा पुनः सम्भालना होगा अपने इस घर को लगानी होगी हर चीज़ करीने से मुक्त करना होगा घर का कोना-कोना सन्नाटों के...

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11:25 AM

आखिर हम हैं कितने आजाद  ? आखिर हम हैं कितने आजाद ?

 फरियाद .... आजादी के इस पावन अवसर पर आइए सुनते हैं इनकी फरियाद चीख-चीखकर ये भी कह रहे हैं आखिर हम हैं कितने आजाद पहली बारी उस मा...

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8:00 AM

खिलने दो खुशबू : मनोज भावुक खिलने दो खुशबू : मनोज भावुक

(कन्या भ्रूण हत्या पर कविता )   खिलने दो खुशबू पहचानो, कलियों को मुसकाने दो आने दो रे आने दो, उन्हें इस जीवन में आने दो जाने किस-किस प्...

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10:00 AM

ग़ज़ल - प्राण शर्मा ग़ज़ल - प्राण शर्मा

बातों में कुछ ऐसे बोल सुना जाते हैं  मीत अपने ही मनमें आग लगा जाते हैं  चिंगारी फूटे न कभी ये नामुमकिन है  दो पत्थर आपस में जब ...

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11:56 AM

ठुकरा दिया मैंने खुदा ठुकरा दिया मैंने खुदा

बंद आँखों पे समझना न नींद का कहर धुंधला न जाएँ सपने सो पलकें गए हैं ठहर । खो गए हो दुनिया की भीड़ में छोड़ मेरा दामन वक़्त थम गया ,...

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11:33 AM

बीनू भटनागर की दो कविताएँ बीनू भटनागर की दो कविताएँ

नदियाँ हिम से जन्मी , पर्वत ने पाली , इक नदिया। घाटी घाटी करती वो , अठखेलियाँ। अपने साथ लिये चलती वो , बचपन की सहलि...

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3:43 PM

अतृप्त इच्छाएं ... अतृप्त इच्छाएं ...

वक्त की डोर से वह उड़ाती है पतंग अपने हाथोँ से वह पकड़ना चाहती है तितलियाँ और बहा देना चाहती है अपने सारे आँसू ठीक नाव की तरह वह चाहती है...

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10:45 AM

वटवृक्ष का ऐतिहासिक अंक वटवृक्ष का ऐतिहासिक अंक

हिंदी ब्लागिंग के एक दशक पर केन्द्रित वटवृक्ष का ऐतिहासिक अंक प्रेस से बाहर आने को आतुर है, किन्तु पाठकों की व्यापक मांग को देखते ह...

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9:54 AM
 
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