सच और झूठ के बीच भ्रमित मन
यथार्थ के स्वाद से दूर होता है ...



रश्मि प्रभा
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प्रतिच्छाया

झूठ मैं कह नहीं सकती
सच्चाई तुम सुन नही सकते
विश्वास से भरे सतरंगी सपने
बुन नही सकते।
गलती है तुम्हारी या फिर ?
दिल तुम्हारा किसी अपनों ने ही
भरमाया है
आश औ विश्वास से बुने
संबंधों को
बार-बार चटकाया है ?
शायद यही वजह है कि
तुम्हें किसी का एतबार नहीं
तुम्हारे अपनों ने शायद
तुम्हे बहुत सताया है
दुःख है कि तुमने
ये कभी नहीं बताया है।
पता चल गया है मुझे कि
तुम्हारी सोच के पीछे
तुम्हारे अतीत का ही हमसाया है
तूँ उन्हीं परिस्थतियों की उपज मात्र
नकारात्मक प्रतिच्छाया है।
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निशा महाराणा

11 comments:

  1. बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

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  2. आपको और आपके समस्त परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें।

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  3. कल 26/10/2011 को आपकी कोई एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है, दीपोत्‍सव की अनन्‍त शुभकामनाएं . धन्यवाद!

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  4. बहुत अच्छी रचना...बधाई एवं शुभकामनाएँ|

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति |

    दिवाली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ|

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  6. बहुत सुन्दर प्रभावी रचना...
    निशा जी को सादर बधाई.....
    दीप पर्व की सादर शुभकामनाये...

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  7. दीपावली केशुभअवसर पर मेरी ओर से भी , कृपया , शुभकामनायें स्वीकार करें

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  8. सुन्दर प्रस्तुति!

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  9. दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें

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  10. अच्छी रचना,सुन्दर प्रस्तुति, दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें

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  11. बहुत सुंदर
    दीपावली की ढेर सारी शुभकामनाएं

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