गीत-

ओढ़कर नींद की चादर ख्वाब में रोज़ आते तुम
रात के तानपुरे पर लोरियां-सी सुनाते तुम
महकते जाफरानों की रेशमी-सी हवाओं में
पत्तियों के हरेपन की ओसभीगी निगाहों में
बर्फ़ के सर्द पर्दे में कहीं हंसते-हंसाते तुम।

ओढ़कर नींद की चादर ख्वाब में रोज़ आते तुम
रात के तानपुरे पर लोरियां-सी सुनाते तुम।

हुस्न की आंच में दमके शोख चहरे ये लम्हों के
सुबह की रूह में जागे हजारों गीत झरनों के
बादलों के दरीचों से धूप-सा खिलखिलाते तुम।

ओढ़कर नींद की चादर ख्वाब में रोज़ आते तुम
रात के तानपुरे पर लोरियां-सी सुनाते तुम।

कभी चुप्पी के आंचल में छिपाकर फूल यादों के
प्यार के हाथ में थामे कभी कचनार वादों के
कभी होठों पर आहट के वहम-सा थरथराते तुम।

ओढ़कर नींद की चादर ख्वाब में रोज़ आते तुम
रात के तानपुरे पर लोरियां-सी सुनाते तुम।


पंडित सुरेश नीरव
http://sureshneerav.blogspot.com/

मध्यप्रदेश ग्वालियर में जन्मे बहुमुखी रचनाकार पंडित सुरेश नीरव की गीत-गजल,हास्य-व्यंग्य और मुक्त छंद विभिन्न विधाओं में सोलह पुस्तकें प्रकाशित हैं। अंग्रेजी,फ्रेंच,उर्दू में अनूदित इस कवि ने छब्बीस से अधिक देशों में हिंदी कविता का प्रतिनिधित्व किया है। हिंदुस्तान टाइम्स प्रकाशन समूह की मासिक पत्रिका कादम्बिनी के संपादन मंडल से तीस वर्षों तक संबद्ध और सात टीवी सीरियल लिखनेवाले सृजनकार को भारत के दो राष्ट्रपतियों और नेपाल की धर्म संसद के अलावा इजिप्त दूतावास में सम्मानित किया जा चुका है। भारत के प्रधानमंत्री द्वारा आपको मीडिया इंटरनेशनल एवार्ड से भी नवाजा गया है। आजकल आप देश की अग्रणी साहित्यिक संस्था अखिल भारतीय भाषा साहित्य सम्मेलन के राष्ट्रीय महासचिव हैं।

11 comments:

  1. बेहद रुचिकर , प्रभावशाली रचना पसंद आई , शुक्रिया जी /

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  2. बहुत खुबसूरत गीत...
    सादर आभार...

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  3. वाह वाह ! बहुत ही ख़ूबसूरत गीत. सच में मन को बहुत भाया.. शुक्रिया और शुभकामनाएँ सम्मानीय सुरेश जी, नमन !

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  4. वाह ...बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

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  5. बहुत ही प्यारा गीत है।

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  6. अच्छी अभिव्यक्ति !

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  7. बहुत ही प्यारी अभिव्यक्ति है सुरेश जी, बधाईयाँ !

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  8. सुन्दर और सार्थक !

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