रिमझिम बारिश
कुछ सोंधी खुशबू
गर्म चाय की प्याली से उठता सिहरता धुंआ
और एक बूंद बारिश का गले लगना
अब तो बस यादों के बादल हैं हर तरफ
और गुफ्तगू चाय और नन्हीं बूंद की ....


रश्मि प्रभा

================================================================
चाय की प्याली में....बारिश की बूँदें

चाय की टपरी
और उसकी छत पर रिमझिम बारिश
मेरी चाय की प्याली में भी
कुछ बूँदें आ गिरी

मीठी चाय में जैसे
नमक-सा घुल गया
फिर एक बार ज़िन्दगी का भूला हुआ
स्वाद याद आ गया

तुम्हारे प्यार की मिठास
मेरे नखरों का नमक

तुम्हारे सपनों की मिठास
मेरे सच का नमक

तुम्हारी क्षणिक-सी मिठास
मेरा शाश्वत-सा नमक

मेरी तत्परता की मिठास
तुम्हारे धैर्य का नमक

तुम्हारी हँसी की मिठास
मेरे आंसुओं का नमक

हमारे रिश्तों की मिठास
मेरे अकेलेपन का नमक

हमारे मिलन की मिठास
तुम्हारी जुदाई का नमक

हमारे झगड़ों की मिठास
हमारे द्वंद्व का नमक

तुम्हारी आहट की मिठास
तुम्हारे इंतज़ार का नमक

बेस्वाद-सी ज़िन्दगी में
फिर से स्वाद भर दिया
आज की चाय की प्याली में
बारिश की बूँदों ने
My Photo






मृदुला हर्षवर्धन

22 comments:

  1. वाह बहुत ही सुन्दर अहसासो को पिरोया है।

    ReplyDelete
  2. ek shabd "wah"
    ek wakya...
    "khubsurat rachna hai!"
    hai na.........:)

    ReplyDelete
  3. वाकई बहुत खुबसूरत थी वो जिंदगानी.

    ReplyDelete
  4. चाय के मीठे स्वाद के साथ नमकीन यादें ...
    सुन्दर !

    ReplyDelete
  5. बारिश की बूँदों में स्वाद लेने के लिए
    आप सब का धन्यवाद
    आभार

    नाज़

    ReplyDelete
  6. वाह ...बहुत बढि़या ।

    ReplyDelete
  7. behad khub mridula ji.. acchi lagi rachna...

    ReplyDelete
  8. zindgee namkeen honee chhahiye
    jee rahe hein nirantar ahsaas honaa chaahiye
    sundar kavita
    badhaayee

    ReplyDelete
  9. गर्मा गर्म चाय के साथ मीठी मीठी यादें...

    ReplyDelete
  10. बेस्वाद-सी ज़िन्दगी में
    फिर से स्वाद भर दिया
    आज की चाय की प्याली में
    बारिश की बूँदों ने

    ....भावों और शब्दों का बहुत खूबसूरत संयोजन...बहुत सुंदर।

    ReplyDelete
  11. हक़ीकत और सपने मिलते हैं तो एक अलग अनुभूति होती है ...सत्य और भ्रम मिलें तो भी एक अलग आनंद है ....
    बहुत सुंदर रचना ...मृदुला जी ...

    ReplyDelete
  12. wow..... बहुत ही खूबसूरती से आपने रिश्तों में आने वाली मीठास और खारे पन को व्यक्त किया है। कभी समय मिले तो आयेगा मेरी भी पोस्ट पर आपका सवागत है।
    http://mhare-anubhav.blogspot.com/

    और एक विनम्र विनती भी है। आपने मेरे mail का reply नहीं दिया है,अब तक यदि समय मिले तो वो भी देखलें ....धन्यवाद

    ReplyDelete
  13. हर चीज़ का अपना मज़ा होता है...और नजरिया भी...आम आदमी ऐसी चाय छोड़ भी सकता है...बहुत खूब...

    ReplyDelete
  14. कमाल अभिव्यक्ति , अभिनव प्रयोग है कविता के शब्द बधाई

    ReplyDelete
  15. खुबसूरत प्रस्तुती....

    ReplyDelete
  16. बारिश!!जब भी आती है,सुकूँ ही देती है,अब चाहे मरुस्थल की तपती रेत हो या,बेस्वाद चाय की प्याली!

    ReplyDelete

 
Top