दो मिनट सालों पर भारी पड़े
कहाँ मैं ख्यालों में थी
दो मिनट में तुमने उनको मिटा दिया
अच्छा हुआ ...
इसे मैंने खुद जाना
और भ्रम से बाहर खुली हवा में निकल आई




रश्मि प्रभा
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बस दो मिनट

तुमने पुछा था
बस दो मिनट के लिए आना चाहती हों
मैंने भी हाँ कह दी थी
यही सोच कर
की उस चेहरे को
जाने फिर कभी
देख भी पाऊँगी या नहीं
क्या सारी बातें
कह पाऊँगी
उन दो minute में
ये सोचा तक नहीं
बस तुम्हे देखना चाहती थी
एक बार तुम्हारी आँखों में देखना चाहती थी
वही प्यार मेरे लिए
जो पहली बार देखा था

अपनों के बीच से उठ कर
जाने क्या कह कर, कैसे आये थे तुम
मुझसे मिलने
उस भीड़ गर्मी शोर में
सिर्फ मेरे कहने पर
देखते ही लगा
तुम्हे बाहों में भर लूं
पर रोक लिया खुद को
तुम्हे लगातार
बिना पलक झपकाए
देखना चाहती थी
पर जी भर कर देख भी नहीं पाई
कुछ कहने की
ज़रुरत महसूस ही नहीं हुई
और फिर तुम चले गए
जी चाहा
तुम्हारा हाथ थाम कर
रोक लूं तुम्हे
पर मैंने खुद को रोक लिया
और तुम्हे जाने दिया
क्यूंकि
इस बार
तुम्हारी आँखों में मेरा अक्स नज़र नहीं आया
इस बार
तुम्हारे छूने में वो प्यार महसूस नहीं हुआ
या शायद ये सब कभी था ही नहीं
बस मेरा भ्रम था
जो मैंने तुम्हारी बातों से
उन सारी रातों से
अपने मन को दिखा रखा था
अच्छा हुआ जो इस बार
तुम
ये भ्रम
तोड़ गए
और मुझे भी
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मृदुला हर्षवर्धन

22 comments:

  1. अच्छा हुआ जो इस बार
    तुम
    ये भ्रम
    तोड़ गए
    और मुझे भी
    बहुत ही अच्‍छा लिखा है आपने ...।

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  2. भ्रम से बाहर निकालती एक मार्मिक अभिव्यक्ति दिल को छू गयी।

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  3. बहुत ही मार्मिक अभिव्यक्ति दिल को छू गयी।...आभार...

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  4. मैं सोच में रह जाती हूँ क्या ठीक है , भ्रम में बने रहना या भ्रम का मिट जाना ...
    दोनों हालत में ही कुछ टूटता तो है ही !
    मार्मिक !

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  5. मार्मिक अभिव्यक्ति

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  6. aap sab ki saraahna ne fir se dil tatol kar aur behtar likhne ko prerit kiya hai

    abhaar

    Naaz

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  7. बहुत ही बढ़िया अभिव्यक्ति !

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  8. बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  9. मार्मिक अभिव्यक्ति...आभार...

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  10. कल 31/08/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  11. बहुत भावनाओं से भरी मार्मिक अभिब्यक्ति /इतनी शानदार प्रस्तुति के लिए बधाई /






    mere blog per aane ke liye thanks.

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  12. प्रभावी रचना

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  13. samvedansheel..............badhiyaa rachnaa.

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  14. जो मैंने तुम्हारी बातों से
    उन सारी रातों से
    अपने मन को दिखा रखा था
    अच्छा हुआ जो इस बार
    तुम
    ये भ्रम
    तोड़ गए
    और मुझे भी |
    अपनी भावनाओं को बहुत खूबसूरती से व्यक्त करने में सफल रचना |
    सुन्दर रचना |

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