शब्दों की शरारत
और मस्त हवा का झोंका - मेरी भावनाएं ...
कभी लेती है लम्बी उड़ान
कभी छुप्पाछुप्पी के खेल
कभी नन्हीं हथेलियों में ढेर सारे ख्वाब
कभी टूटे ख़्वाबों की झिलमिलाती बूंदें
और फिर ..... नए ख्वाब , नई शरारत, नई उड़ान
....
ज़िन्दगी रूकती कहाँ है !!!


रश्मि प्रभा


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कभी मैं खुद ...

" कभी मेरे शब्द शरारत करते हैं और कभी मैं खुद ......"

बहते हैं जब मेरे अधूरे ख्वाब ,
मेरी आँखों से कतरा - कतरा ,
कभी बिखरकर टूट जाते हैं ,
कभी मैं खुद उन्हें , पोंछ लेती हूँ !

आती है जब जिंदगी में मुश्किलें ,
नदी के तीव्र बहाव की तरहा,
तब उड जाते हैं , बह जाते हैं ,
सहारे मेरे , पुराने बांधो की तरहा ,
कभी दूर बहे निकल जाते हैं ,
कभी मैं खुद उन्हें , छोड़ देती हूँ !

मिलती है जब नयी रौशनी ,
फिर एक नए जन्म की तरह ,
तब लगता है पुराना सब ,
सफ़ेद और शांत , नए की तरह ,
कभी आँखें चौंध जाती हैं ,
कभी मैं खुद उन्हें , मूंद लेती हूँ !


खिलखिलाते हैं शब्द मेरे,
जब कभी बालक की तरह ,
छिपा होता है दर्द कविताओं में ,
कागज की तरह ,
कभी शब्द छिटक-कर बिखर जाते हैं ,
कभी मैं खुद उन्हें ,कागज में बांध देती हूँ !
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अंजलि माहिल(ममता )

22 comments:

  1. कभी नन्हीं हथेलियों में ढेर सारे ख्वाब
    कभी टूटे ख़्वाबों की झिलमिलाती बूंदें
    और फिर ..... नए ख्वाब , नई शरारत, नई उड़ान

    वाह ... बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ... आभार ।

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  2. कभी शब्द छूट जाते हैं , कभी छोड़ दिए जाते हैं ...
    सुन्दर अभिव्यक्ति!

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  3. वाह, भावनाओं को कितनी सुन्दर तरीके से अंजलि जी शब्दों में पिरोये हैं ...

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  4. बहुत ही अच्छी रचना थी....

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  5. बहते हैं जब मेरे अधूरे ख्वाब ,
    मेरी आँखों से कतरा - कतरा ,
    कभी बिखरकर टूट जाते हैं ,
    कभी मैं खुद उन्हें , पोंछ लेती हूँ !
    कोमल भाव लिए सुन्दर अभिव्यक्ति....

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  6. द्वंदों की खुबसूरत अभिव्यक्ति. प्यारा आन्तरिक संवाद खुद से ही.

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  7. मिलती है जब नयी रौशनी ,
    फिर एक नए जन्म की तरह ,
    तब लगता है पुराना सब ,
    सफ़ेद और शांत , नए की तरह ,
    कभी आँखें चौंध जाती हैं ,
    कभी मैं खुद उन्हें , मूंद लेती हूँ !

    वाह....सुन्दर भावाभिव्यक्ति..:)

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  8. सुन्दर भावाभिव्यक्ति

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  9. खूबसूरत अभिव्यक्ति।

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  10. खिलखिलाते हैं शब्द मेरे,
    जब कभी बालक की तरह ,
    छिपा होता है दर्द कविताओं में ,
    कागज की तरह ,

    बहुत ही सार्थक प्रस्तुति....
    सादर बधाई...

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  11. sunder abhivyakti...........

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  12. कमाल की अभिव्यक्ति...

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  13. लम्बे अंतराल के बाद वटवृक्ष पर आना सुखदा रहा ...........

    हम सब के शब्दों में ही सारी दुनिया सिमटी है ........आभार

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  14. सर्व श्रेष्ठ कवयत्री के पुरस्कार के लिये मनपूर्वक हार्दिक अभिनंदन!!!

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  15. सर्व श्रेष्ठ कवयत्री के पुरस्कार के लिये मनपूर्वक हार्दिक अभिनंदन!!!

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  16. बहते हैं जब मेरे अधूरे ख्वाब ,
    मेरी आँखों से कतरा - कतरा ,
    कभी बिखरकर टूट जाते हैं ,
    कभी मैं खुद उन्हें , पोंछ लेती हूँ !

    bahut sunder..komalta ka ehsaas liye ek sunder kavita..

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  17. बहते हैं जब मेरे अधूरे ख्वाब ,
    मेरी आँखों से कतरा - कतरा ,
    कभी बिखरकर टूट जाते हैं ,
    कभी मैं खुद उन्हें , पोंछ लेती हूँ !

    bahut sunder..komalta ka ehsaas liye ek sunder kavita..

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  18. बहुत बहुत धन्यवाद आपका रश्मि जी ....मुझे यहाँ शामिल करने के लिए ...

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