मीठे आम मीठे आम
भूल गए हम सारे काम
कोई है छोटा कोई है टेढ़ा
लेकिन सब है बड़ा रसीला
आओ मिलकर खाएं आम
भूल के अपने सारे काम
मीठे आम मीठे आम ......................


 रश्मि प्रभा 



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--गरीब का भाई




सुनो कहानी एक नई
मई मास में डाली डाली
झूल रहे, हरे -रसीले
पीले -पीले आम ।


लाल -लाल गालों वाले
छोटे -छोटे हाथ उठाकर
तुम्हें बुलाते प्यारे बच्चों
दोड़ो -आओ,खाओ आम।


तेज हवा
के झोंकों से
टप से गिर गये आम
जल्दी उठाओ ,पानी से धोलो

मीठे मिश्री से आम।

चूस -चूस कर गुठली फेंको
उनको सुलाओ माटी में
उग आएगा आम का पौधा
सुन्दर सा सुकुमार।


गरीब का भाई /सुधा भार्गव

गरीब फुलवा ने ऐसा ही किया । उसकी माँ को एक दिन एक आम मिल गया |
देखते ही वह उस पर पिल पड़ा । स्वाद ले- ले कर उसे चूसने लगा और गुठली लापरवाही से झोंपड़ी के आगे डाल दी ।

दूसरे दिन सुबह वह सोकर उठा और गुठली देखने बाहर आया पर उसे कहीं न दिखाई दी । असल में रात में पानी बरसने के कारण गुठली मिट्टी में दब गयी थी ।

कुछ दिनों बाद उसने फिर गुठली खोजी ,वह तो नहीं मिली पर उसकी जगह कोमल -कोमल पत्तों वाला नन्हा सा पौधा खड़ा मिला।

उसे देखकर फुलवा मुस्करा दिया और बोला --पौधे भाई ---पौधे भाई --घर के बाहर क्यों खड़े हो।चलो मेरे साथ अन्दर, मैं तुम्हारे साथ खेलूंगा ।

- धीरे से उठाना वरना मुझे चोट लग जायेगी ।धीमी आवाज आई।
-तुम मेरे भाई हो। तुम्हें सावधानी से अन्दर ले जाकर एक गमले में रख दूँगा।

-थोड़े दिनों में मैं बड़ा हो जाऊँगा --गमला तो फिर मेरे लिए छोटा पड़ जायेगा |पौधा कमर मटकाकर बोला ।
-फिर मैं क्या करूँ ----
-तुमने मुझे अपना भाई बनाया है सो तुम्हारे साथ ही रहना पसंद करूंगा लेकिन घर के अन्दर नहीं ---बाहर।
-क्यों ?
-बड़े होने पर मेरी जड़ें नीचे गहराई तक चली जायेंगी लम्बाई-मोटाई में मैं तुमसे बड़ा हो जाऊँगा । तबतो तुम्हारा आँगन भी छोटा पड़ने लगेगा।
फुलवा सिर खुजलाते हुए बोला --कह तो ठीक रहे हो पर तुम्हारे साथ रहूँगा कैसे !
-तुम रोज मेरे पास सुबह -शाम आना ,मेरी देखभाल करना मुझे पानी और खाद की भी जरूरत होगी ।
-क्यों ?
-जिस तरह तुम्हें भूख -प्यास लगती है उसी तरह मुझे भी लगती है ।
-तुम्हारा साथ मुझे बहुत अच्छा लगता है । तुमसे मिलने सुबह -शाम जरूर आऊँगा ।

फुलवा की देखरेख में पौधा बड़ा होने लगा ।फल -फूल और पत्तों से भरपूर आम का पौधा एक बड़ा पेड़ बन गया ।


अब फुलवा उसकी देखभाल नहीं करता था बल्कि पेड़ फुलवा का ध्यान रखता था ।

फुलवा और उसकी माँ खूब आम खाते। जो बचते वे ग़रीब बच्चों में बाँट दिये जाते ताकि कोई आम के लिए न तरसे ।

एक दिन फुलवा बोला -पेड़ भाई .मैं तो बहुत पढ़ना चाहता हूं पर इसके लिए पैसा नहीं है ।
-पैसा !पैसा तो तुम कमा सकते हो ।
-मैं --मैं तो बहुत छोटा हूं।
-छोटे नहीं--- अब बड़े हो गये हो । टोकरी में आम भरकर बाजार में बेच आओ। बस आ जायेगा पैसा ।निकल आएगा फीस -किताब का खर्चा।
-तब तो मैं माँ को काम भी नहीं करने दूँगा । देख लेना--- घर में रानी बनाकर रखूँगा उसे ।
-बस देखने शुरू कर दिये सपने । सपने सच करने के लिए कुछ करना भी पड़ता है । पहले आम बेचने तो जाओ ।


बड़े -बड़े, रसीले आम देख खरीदारों ने फटाफट खरीद लिए ।पहली बार उसकी जेब में सिक्के खन -खन कर रहे थे।उनकी आवाज सुनकर वह हवा में उडा जा रहा था |

रास्ते से फुलवा ने खुशी -खुशी फूलों की एक माला खरीदी|
पेड़ भाई को उसने माला पहनाई और कहा --तुम्हारे कारण ही मेरी जेब में आज सौ रूपये हैं । यह मै कभी भूल नहीं सकता ।
घर में वह फुर्ती से गया और चिल्लाया --
-माँ --माँ --देखो तो --आम बेचकर मैं बहुत से रूपये लाया हूं ।

चकित होकर माँ अपने बेटे पर प्यार ही प्यार उड़ेलने लगी । लेकिन वह अपने दूसरे बेटे को नहीं भूली । रोली चावल लेकर बाहर आई । आम के पेड़ को तिलक लगाया ।
बोली --फुलवा ,मुझसे वायदा करो -- पेड़ भाई की हमेशा रक्षा करोगे ।.वह हमारी भलाई करने वाला है।उसे काटकर -,तोड़कर कष्ट न पहुँचाना ।


माँ --मैं सब समय तुम्हारी बात याद रखूँगा ।फुलवा ने अपने पेड़ भाई पर स्नेह से हाथ फेरा।
इतनी अच्छी माँ और भाई को पाकर पेड़ भाई तो खुशी से झूम उठा । ऐसा झूमा ----- डालियाँ भी नाच उठीं । लाल.हरे -पीले -आम दोनों के चारों ओर बिछ गये।
कह रहे थे ---

प्यार के झोंकों से

टप से गिरे हम v
लपलप -लपलप
भागम भाग -भाग
चूसो -खाओ आम
भाग -भाग -भाग
आम
हमारा राष्ट्रीय फल
-देवताओं का प्रिय भोजन ।
-कवि कालीदास ने इसकी प्रशंसा में गीत गाये।
-ग्रीक राजा एलेक्जेंडर द ग्रेट और चीनी यात्री ह्येन त्सेंग (Hieun tsang)को यह फल बहुत स्वादिष्ट लगा ।
-मुसलमान बादशाह अकबर ने दरभंगा (बिहार )में १००,०००आम के पेड़ लगवाये ।
-आमों में विटामिन ए ,सी .डी भरपूर मात्रा में पाया जाता है ।


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कविता .कहानी संस्मरण मुक्तक ,आलेख आदि विधाओं पर मेरी लेखनी गतिशील है !पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित होती रहती हैं !विभिन्न संस्थाओं से जुडाव है !प्रकाशित काव्य -संग्रह 'रोशनी की तलाश में '!इसे डा .कमला रत्नम पुरस्कार मिल चुका है !प्रकाशित बाल पुस्तकें --१ अंगूठा चूस , २ अहंकारी राजा ३ ,जितनी चादर उतने पैर पसार !तीसरी कृति 'राष्ट्रीय शिखर साहित्य सम्मान 'से अलंकृत हो चुकी है !प. बंगाल -की ओर से मुझे 'राष्ट्र निर्माता पुरस्कार 'मिला !

15 comments:

  1. bahut shiksha prad kahani .....

    kai bate aapne is choti kahani main keh dee hai........

    jai baba banaras...............

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  2. वाह ...बहुत ही खूब ... इस प्रेरणात्‍मक एवं ज्ञानवर्धक प्रस्‍तुति के लिए ...आपका बहुत-बहुत आभार और सुधा जी को बधाई ।

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  3. बहुत सुन्दर और शिक्षाप्रद्।

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  4. बहुत सरस और शिक्षाप्रद कहानी

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  5. बहुत सुन्दर
    और प्रेरणा का एक बहुत प्यारा श्रोत

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  6. सुधा जी,आम के माध्यम से सामाजिक परिवेश, मावनीय संवेदनाओं और प्रकृति से उसके तारतम्य को उजागर करती रचना.अत्यंत मनमोहक एवं शिक्षाप्रद रचना.

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  7. बहुत सरस और शिक्षाप्रद कहानी

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  8. अच्छी कहानी, संदेश देने में कामयाब|

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  9. मधुर रसमय कथा, ज्ञानवर्धक जानकारी!!

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  10. bahut achi...
    kripya meri bhi kavita padhe aur apni raay den..
    www.pradip13m.blogspot.com

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  11. कृपया मेरी भी कविता पढ़ें और अपनी राय दें..
    www.pradip13m.blogspot.com

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  12. अत्यंत मनमोहक एवं शिक्षाप्रद रचना

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  13. क्या बात है...आज हर जगह आम छाया हुआ है...वटवृक्ष पर भी...सुधा जी को इतने सहज ढंग से अपनी बात कहने के लिए बधाइयाँ...

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  14. Hai mujhe to mukh se pani aa gya

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