तुम तो माँ हो
मैं ही नहीं पूरी प्रकृति
तुम्हारे आँचल में है
माँ इस आँचल से कुछ भाव मुझे भी दो न
मुझे भी बनना है - बिल्कुल तुम्हारी तरह ....

रश्मि प्रभा



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मां बताओ न .... ?

मुझे भी मां
कविता लिखनी है
कुछ बताओ न ....।

कैसे लिखूं
मैं इनमें रंगों की भाषा
पक्षियों का कलरव
फूलों की खुश्‍बू
सूरज की रौशनी
रात का अंधेरा
वो सितारों की जगमगाहट
चांद का
बादलों में छुपना निकलना
नदिया की कलकल
पहाड़ों का अडिग रहना
हर परिस्थिति में
पेड़ो का पथिकों को छांव देना
तपती दुपहरी में
बताओ न .... ।।

तुम तो हर बात पर लिख लेती हो
मुझे भी लिखना है
न्‍याय और अन्‍याय पर
सत्‍य और मिथ्‍या पर
हास और परिहास पर
जीवन और मृत्‍यु पर
आशा और निराशा पर
पाप और पुण्‍य पर
प्‍यार और सिर्फ प्‍यार पर
नफरत से तुम कोसो दूर हो
देने और देने पर
लेने पर तुम विश्‍वास नहीं रखती
बताओ न ....।।
तुम कभी कृष्‍ण की तरह उपदेश देती हो
कभी पार्थ बनकर समर भूमि में
ज्ञान का पाठ पढ़ती हो
तुम कभी हार कर थकती नहीं
चलती ही रहती हो
शब्‍दों के इस खेल में
तुम्‍हारे भी सारथी श्रीकृष्‍ण हैं
तुम्‍हारी भी दृष्टि मछली की आंख पर
जाकर ठहर गई है
या फिर तुम बतलाना चाहती हो
नारी कभी भी
अबला नहीं होती वो
मां है दुर्गा का अवतार है
हर हाल में अपने बच्‍चों की रक्षा
करती है
फिर चाहे युग कोई भी हो
नारी की शक्ति
हमेशा ही सर्वज्ञ रही है
सीता की अग्नि परीक्षा में भी
सावित्री के तप में भी
मां बताओ न ....।।।

() सीमा सिंघल

15 comments:

  1. मुझे भी मां
    कविता लिखनी है
    कुछ बताओ न ....।
    behad koobsurat kavita hai.....saat hi rashmiprabhajee ke shabd wah....

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  2. बहुत सुन्दर भावमय रचना। सीमा जी को बधाई।

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  3. अपने शब्द माँ से मांग लेना ..
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति !

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  4. बहुत सुन्दर भाव संयोजन है इस रचना मे।

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  5. pyari si rachna..........lagta hai maine padha hai, :)

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  6. अपने शब्द माँ से मांग लेना ..
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति !

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  7. kavita ke bahane maa ka bimb beti ki nazar se...bahut sunder...

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  8. बहुत खूबसूरत भाव।
    शुभकामनाएं आपको।

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  9. रश्मि दी, आपका बहुत-बहुत आभार इस रचना को वटवृक्ष पर प्रस्‍तुत करने के लिये ...एवं आप सभी का शुक्रिया इस रचना को पसन्‍द करने के लिये ....।।

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  10. होली की अपार शुभ कामनाएं...बहुत ही सुन्दर ब्लॉग है आपका....मनभावन रंगों से सजा...

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