आँखों के सपने सिड़ने को हैं
दिखा दो सूरज
उनकी जिजीविषा को यूँ मिटने ना दो ....



रश्मि प्रभा




=============================================================

My Photo

सपनों को दिखा दो सूरज


स्वप्न
सदियों से
तुम्हारी आँखों में
जो पल रहे हैं
इतिहास होने से पहले
उन्हें एक बार
सूरज दिखा दो

सपनो का
होता है अपना भूगोल
अपनी दिशाएं
अपने मौसम
जो निर्भर होते हैं
मन के भीतर बहने वाली
हवाओं पर

धूप में बिछा दो
मन की चटाई
और उलट पुलट लो
सोते सपनो को
सील गए हैं
दबे दबे
ह्रदय की दीवारों के
किसी कोने में

लगने दो वसंती हवा
कि खिल उठेंगे
उनके मुरझाये रंग
और बोल पड़ेंगे
सोये हुए ज़ज्बात
थोड़ी साँसे मिल जाएँगी
सपनों को भी

दे दो
कुछ पंख चुनकर
जो छोड़े थे कबूतरों ने
सपनों को
भरने को उड़ान
उन्मुक्त आकाश में
करने दो
सफ़ेद सेमल के फाहों से तैरते
बादलों से मन की बातें

देर तक
रखने से बंद
अँधेरे कोठरी में
या फिर प्राचीर के विस्तार में भी
घुट सकता है दम
फिर ये तो सपने हैं
नाजुक से गौरैया के
नए पंख वाले बच्चों की तरह
छोड़ दो उन्हें स्वछन्द
एक बार के लिए

आँखों के
सपनों को
दिखा दो सूरज
() अरुण चन्द्र रॉय  पेशे से कॉपीरायटर तथा विज्ञापन व ब्रांड सलाहकार. दिल्ली और एन सी आर की कई विज्ञापन एजेंसियों के लिए और कई नामी गिरामी ब्रांडो के साथ काम करने के बाद स्वयं की विज्ञापन एजेंसी तथा डिजाईन स्टूडियो का सञ्चालन. अपने देश, समाज, अपने लोगों से सरोकार को बनाये रखने के लिए कविता को माध्यम बनाया है.
ब्लॉग : http://www.aruncroy.blogspot.com/

19 comments:

  1. सपनो का
    होता है अपना भूगोल
    अपनी दिशाएं
    अपने मौसम
    जो निर्भर होते हैं
    मन के भीतर बहने वाली
    हवाओं पर
    wah.kitni achchi kavita likhi hai aapne ,man khush ho gaya padhkar.

    ReplyDelete
  2. नाजुक से गौरैया के
    नए पंख वाले बच्चों की तरह
    छोड़ दो उन्हें स्वछन्द
    एक बार के लिए

    बहुत बढ़िया बात कही है राय जी ने ... स्वप्नों को बंधन में रखना ही नहीं है ...

    ReplyDelete
  3. दे दो
    कुछ पंख चुनकर
    जो छोड़े थे कबूतरों ने
    सपनों को
    भरने को उड़ान
    उन्मुक्त आकाश में
    करने दो
    सफ़ेद सेमल के फाहों से तैरते
    बादलों से मन की बातें
    बहुत ही सुन्‍दर शब्‍दों....बेहतरीन भाव....खूबसूरत कविता...

    ReplyDelete
  4. swapn jab unmukt hote hai tabhi falibhoot hote hai iske liye unka man ke pinjaron se niakalna jaroori hai...bahut khoobsurat analysis...

    ReplyDelete
  5. लगने दो वसंती हवा
    कि खिल उठेंगे
    उनके मुरझाये रंग
    और बोल पड़ेंगे
    सोये हुए ज़ज्बात
    थोड़ी साँसे मिल जाएँगी
    सपनों को भी

    कि कुछ पल और जी लेगे वे....दिल को छूने वाली खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

    ReplyDelete
  6. अब सभी ब्लागों का लेखा जोखा BLOG WORLD.COM पर आरम्भ हो
    चुका है । यदि आपका ब्लाग अभी तक नही जुङा । तो कृपया ब्लाग एड्रेस
    या URL और ब्लाग का नाम कमेट में पोस्ट करें ।
    http://blogworld-rajeev.blogspot.com
    SEARCHOFTRUTH-RAJEEV.blogspot.com

    ReplyDelete
  7. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (7/2/2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
    http://charchamanch.uchcharan.com

    ReplyDelete
  8. क्या बात है !! बहुत बढ़िया ...

    ReplyDelete
  9. बहुत सुन्दर रचना.

    ReplyDelete
  10. धूप में बिछा दो
    मन की चटाई
    और उलट पुलट लो
    सोते सपनो को
    सील गए हैं
    दबे दबे
    ह्रदय की दीवारों के
    किसी कोने में
    .....सपनों की ओर से धन्यवाद
    बहुत अच्छी कविता ..

    ReplyDelete
  11. सपनों को
    भरने को उड़ान
    उन्मुक्त आकाश में...

    Awesome !

    .

    ReplyDelete
  12. kya kahne hain...shabdo ki kami ho rahi hai...ek behtareen rachna..!:)

    ReplyDelete
  13. बहुत ही खूबसूरत शब्‍द ।

    ReplyDelete
  14. रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति

    ReplyDelete
  15. sakaraatmak aur saarthak rachna keliye arun ji ko badhai.

    ReplyDelete
  16. sakaraatmak aur saarthak rachna keliye arun ji ko badhai.

    ReplyDelete
  17. sakaraatmak aur saarthak rachna keliye arun ji ko badhai.

    ReplyDelete

 
Top