बहुत सहज था सब
...खामखाह प्रश्नों के घेरे में खड़े हो गए
जिनकी कोई बिसात न थी
वे भी उपदेशक बन गए ...!
जवाब ना देना अपनी कमजोरी नहीं
उन पर रहमोकरम है
जिस दिन ये नज़रें घुमाई हमने
--- या खुदा !
कोई पानी देनेवाला न होगा !!!


रश्मि प्रभा

20 comments:

  1. जिस दिन ये नज़रें घुमाई हमने
    --- या खुदा !
    कोई पानी देनेवाला न होगा !!!

    गहरे भाव उकेरते ये शब्‍द ...बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  2. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...

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  3. बेहद गहन अभिव्यक्ति।

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  4. जिस दिन ये नज़रें घुमाई हमने
    --- या खुदा !
    कोई पानी देनेवाला न होगा !!!

    यह बात समझ आ जाये तो बात ही क्या है....बहुत सटीक अभिव्यक्ति

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  5. जिस दिन ये नज़रें घुमाई हमने
    --- या खुदा !
    कोई पानी देनेवाला न होगा !!!

    जबरदस्त!

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  6. shiv ki teesri aankh....bhasm na ho jaye, prashn karne wala...ramhokaram di...:)

    as usual....meri di...no. 1!!

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  7. शुभानअल्लाह!

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  8. नरम-नरम सी दिख रही आँखों के अंदर की फौलादी ताकत का अंदाजा सहज ही महसूस हो रहा है

    उत्तम रचना!

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  9. जिस दिन ये नज़रें घुमाई हमने
    --- या खुदा !
    कोई पानी देनेवाला न होगा !!

    bahut khub
    kya bat hai
    ....
    mere blog par
    "main"

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  10. जुदा अंदाज़ पर बात एक दम खरी! आभार!

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  11. बेहतरीन अभिव्‍यक्ति

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  12. जवाब ना देना अपनी कमजोरी नहीं , उन पर रहमो करम है ...
    क्या अंदाज़ है ... !

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  13. बहुत ही सुंदर ...और सच से रूबरू

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  14. अनुपम जी से सहमत हूँ ... नारी कोमल है पर कभी वो भी फौलादी बन सकती है ...

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