सांप सीढ़ी .... सांप सीढ़ी ....

कोई भी खेल व्यर्थ नहीं खेले जाते , लेकिन बचपन की मासूमियत में हम कहाँ जान पाते हैं - किस मोड़ पर सांप आएगा, किस मोड़ पर सीढ़ी - पूरी ज़िन्दगी ...

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11:00 AM

निरक्षर इज्जत पाते हें .. निरक्षर इज्जत पाते हें ..

बचपन में मैंने विद्यालय की दीवारों पर पढ़ा था - 'पढ़ते सभी हैं , पर जानते नहीं क्या पढ़ें !' तो निर्भर है कि हम क्या सीखते हैं... महज...

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11:00 AM

तुम और तुम्हारी मेरी बातें... तुम और तुम्हारी मेरी बातें...

ख़्वाबों के आँगन में नन्हें सपनों की आहटें कुछ कर गुजरने की बातें करते हैं, सूरज को मुट्ठी में भरकर प्रकाश को अप नी धरोहर बना लेने की क...

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11:00 AM

हिन्दी - अंग्रेजी का वाक् युद्ध हिन्दी - अंग्रेजी का वाक् युद्ध

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दुस्तां हमारा '.... स्वर में , बुलंद स्वर में गाना सहज है . 'हिंदी हैं हम वतन है हिन्दुस्तां हमारा...' प...

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11:00 AM

मैं भी रखना चाहता हूँ व्रत तुम्हारे लिए मैं भी रखना चाहता हूँ व्रत तुम्हारे लिए

तेरे पास आके हमने , जो पल ये गुज़ारे हैं कैसे बताऊँ तुमको , वे ही साथ हमारे हैं मैंने कहा था सबसे , तू पास ही है मेरे लेकिन ये अब लगा है , ...

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11:00 AM

ज़रा ठहरो ज़रा ठहरो

मैं खुद एक नज़्म हूँ , जिसे सृष्टिकर्त्ता ने अनमोल शब्दों से सजाया और किताब के पन्नों में रखे गुलाब की तरह संजो दिया .......... कभी फुर्सत ...

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11:00 AM

'' तीन छोटी कवितायेँ '' '' तीन छोटी कवितायेँ ''

कोई बा त , कोई भावना छोटी नहीं होती, बस मुख्य बात ये है कि हम उसे कैसे लेते हैं ! विस्तृत आकाश के मुहाने से टूटता एक तारा भी संबल बन जाता है...

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11:00 AM

जीने की हसरत जीने की हसरत

दर्द पीने की आदत हुई मुस्कुराने का सबब जो खोजा दर्द पास आकर सो गया देता है चैलेन्ज तिरछी नज़रों से पूछता है- कब तक मुस्कुराने का सबब पाओगे ! ...

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11:00 AM

अभिलाषाओं का टोकरा. अभिलाषाओं का टोकरा.

ख्वाहिशों के विस्तृत आकश को हर दिन टांगती हूँ बाहर , अपने खजाने से चाँद, सूरज निकालती हूँ , तारों के धवल चादर पर मोहक सपने बिखेर देती हूँ ....

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10:30 AM

स्त्री – एक अपरिचिता स्त्री – एक अपरिचिता

प्रश्न यह गंभीर नहीं कि रिश्तों में दरार कैसे आई, प्रश्न यह महत्वपूर्ण है कि जिन रिश्तों में मिठास नहीं थी वे साथ चले कैसे !सपने और हकीकत के...

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11:00 AM

शेष २४ घंटे और आप ! शेष २४ घंटे और आप !

२४ घंटे का वक़्त ....... घड़ी की टिक टिक दिल दिमाग पर हावी हो जाएगी , और सच सामने खड़ा मेरी आँखों से बहने लगेगा , आवाज़ दूंगी अपने बच्चों क...

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11:00 AM

हम कहानियों का सहारा क्यूँ लें ? हम कहानियों का सहारा क्यूँ लें ?

लोग ! इतने अहम् हो उठते हैं कि हम भूल जाते है जीना ... और लोग , उनको तो बस मौका चाहिए ! कहते हैं न ' पर उपदेश कुशल बहुतेरे' ... गलत...

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11:00 AM

मेरा शून्य... मेरा शून्य...

सपनोंवाली आँखों में कैक्टस चुभते हैं , मचलते पैर सच से लहुलुहान हो जाते हैं भरी हथेलियाँ खाली हो जाती हैं , हँसते चेहरे पर आंसू ही आंसू होते...

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11:00 AM

एक शाख वटवृक्ष की एक शाख वटवृक्ष की

उम्र थी तो किसी ने सिखाया ही नहीं कि मुखौटे पहनना ज़रूरी है ! वक़्त हाथ से रेत की तरह फिसलने लगा तो हर तरह के मुखौटे ले आई ...... मुखौटे पह...

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11:00 AM
 
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