एक लड़की-
पुरवा का हाथ पकड़
दौड़ती है खुले बालों मे
नंगे पाँव....
रिमझिम बारिश मे !
अबाध गति से हँसती है
कजरारी आंखो से,
इधर उधर देखती है...
क्या खोया? - इससे परे
शकुंतला बन
फूलों से श्रृंगार करती है
इस सौन्दर्य को बरक़रार रखो, वरना प्रकृति तुम्हारा साथ नहीं देगी ...

रश्मि प्रभा








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लडकियाँ और आदमी!


लडकियाँ कितनी ,
सहजता से,
बेटी से नानी बन जातीं है!


लडकियाँ आखिर,
लडकियाँ होती हैं!


शिव में ’इ’ होती है,
लडकियाँ,
वो न होतीं तो,
’शिव’ शव होते!


’जीवन’ में ’ई’,
होतीं हैं लडकियाँ
वो न होतीं तो,
वन होता जीव-’न’ न होता!
या ’जीव’ होता जीव-न, न होता!


और ’आदमी’ में भी,
’ई’ होतीं हैं,यही लडकियाँ!


पर आदमी! आदमी ही होता है!
और आदमी लडता रह जाता है,
अपने इंसान और हैवानियत के,
मसलों से!
आखिर तक!


फ़िर भी कहता है,
आदमी!
क्यों होती है?
ये ’लडकियाँ’!


हालाकि,
न हों उसके जीवन में,
तो रोता है!
ये आदमी!


है न कितना अजीब ये,
आदमी!


_By 'Ktheleo'
"सच में" http://www.sachmein.blogspot.com/

22 comments:

  1. वो न होतीं तो,
    ’शिव’ शव होते!


    बहुत गहन वक्तव्य ....

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  2. फ़िर भी कहता है,
    आदमी!
    क्यों होती है?
    ये ’लडकियाँ’!
    बहुत खूब ई की महत्ता को कौन मिटा सकता है। शिव भी शव हो जाते हैं इसके बिना। धन्यवाद सुन्दर कविता पढवाने के लिये।

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  3. क्या बात कही है ………………गज़ब की रचना है………………आभार्।

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  4. लड़कियों की महत्‍ता पर नया नजरिया।

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  5. वाह... मज़ा आ गया पढ़कर...
    पर लोगों को अभी भी ई की महत्वता पर ऐतराज़ है...

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  6. आप सब का आभार, मेरी भावनाओं के साथ, इत्तेफ़ाक रखने के लिये!

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  7. शिव भी शव हो जाते हैं इसके बिना |
    सुन्दर कविता......

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  8. गहन भाव लिये ...बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  9. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना कल मंगलवार 14 -12 -2010
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..


    http://charchamanch.uchcharan.com/

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  10. बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति.........मेरा ब्लाग"काव्य कल्पना" at http://satyamshivam95.blogspot.com/ जिस पर हर गुरुवार को रचना प्रकाशित साथ ही मेरी कविता हर सोमवार और शुक्रवार "हिन्दी साहित्य मंच" at www.hindisahityamanch.com पर प्रकाशित..........आप आये और मेरा मार्गदर्शन करे..धन्यवाद

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  11. वो न होतीं तो,
    ’शिव’ शव होते!
    बहुत शानदार...

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  12. गहरी अभिव्यक्ति ... मुझ से पूछो तो इश्वर का रूप होती हैं लडकियां ...

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  13. खूब लिखा है - ई / लड़की के महत्व को बताती ये कवी खूब भायी ... शुभकामनायें

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  14. आप सब का ह्रदय से आभार, मेरी भावनाओं से इत्तेफ़ाक रखने के लिये व प्रशसां के लिये धन्यवाद!

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  15. वाह वाह वाह
    'इ' और 'ई' की क्या विवेचना की है आपने क्थेलिओ जी| और रश्मि जी को भी बहुत बहुत आभार फिर से कुछ नया पढ़वाने के लिए| आदमी का आदम रह जाना, ओहोहोहो............ बहुत खूब|

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  17. शिव में ’इ’ होती है,
    लडकियाँ,
    वो न होतीं तो,
    ’शिव’ शव होते!


    बहुत गहन चिंतन से परिपूर्ण समसामयिक अभिव्यक्ति...लडकियां वास्तव में ईश्वर की सर्वश्रेष्ट देन हैं..बधाई..

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  18. ये "ई" वाली approach तो कमाल की है.वाह जी वाह ,खूब लिखा है

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  19. शिव में ’इ’ होती है,
    लडकियाँ,
    वो न होतीं तो,
    ’शिव’ शव होते!


    गजब की अभिव्यक्ति.

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