दर्द पीने की आदत हुई
मुस्कुराने का सबब जो खोजा
दर्द पास आकर सो गया
देता है चैलेन्ज तिरछी नज़रों से
पूछता है-
कब तक मुस्कुराने का सबब पाओगे !

रश्मि प्रभा

======================================================
!! जीने की हसरत !!

दबी दबी सी इक हसरत थी
मेरे जीने की
तेरी जुदाई में दम निकला और मर ही गयी

मौत शर्मिंदा हुई हर शक्स ने तनहा ही किया
बस एक तन्हाई थी जो मेरी
तनहा छोड़ गयी
दबी दबी सी इक हसरत थी ...

दर्द अब रोने लगा आंसू मेरे शर्माने लगे
जब आईने में खुद को ढूँढा
तेरी तस्वीर बनी
दबी दबी सी इक हसरत थी
मेरे जीने की ...

रसप्रीत आहूजा

16 comments:

  1. सचमुच खूबसूरत है यह अभिव्यक्ति !

    ReplyDelete
  2. वाह ………बहुत ही सुन्दर भाव संजोये हैं।

    ReplyDelete
  3. बहुत ही भावपूर्ण रचना...

    ReplyDelete
  4. दबी दबी सी जीने की हसरत ...
    अच्छी कविता ...

    ReplyDelete
  5. खूबसूरत भावपूर्ण अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  6. बेहतरीन शब्‍द रचना ।

    ReplyDelete
  7. बहुत खूबसूरत....

    ReplyDelete
  8. बेहतरीन अभिव्यक्ति !

    ReplyDelete
  9. achchhi rachna raspreet.........badhai:)

    ReplyDelete
  10. dard to pyar se nikalta hai pyar kabhi marta nahi jeene ki hasrat deta hai yahi to jindagi hai .khobsurat

    ReplyDelete

 
Top