चलो थोड़ी चांदनी चुरा लायेंऔर सबके दिल में भर दें।बहुत अँधेरा है दिलों में,निराशा हर कोने में पसरी है.....थोड़ी चांदनी चुरा लेने से भला चाँद का क्या जाएगा....!
() रश्मि प्रभा


मेरी पहचान :
पूछी है मुझसे मेरी पहचान;
भावों से घिरी हूँ इक इंसान;
चलोगे कुछ कदम तुम मेरे साथ;
वादा है मेरा न छोडूगी हाथ;
जुड़ते कुछ शब्द बनते कविता व गीत;
इस शब्दपथ पर मैं हूँ तुम्हारी “मीत”!!




!! जख्म !!

बन्द हैं चौखट के उस पार
अतीत की कोठरी में
पलों के रत्न जड़ित
आभूषण
एक दबी सी आहट
सुनाती
एक दीर्घ गूंज
समय चलता
अपनी उलटी चाल
घिरता कल्पनाओं का लोक
लम्हों को परिचालित करता
अपने अक्ष पर
प्रतिध्वनित हो उठती
अनछुई छुअन
सरिता बन जाता
समुद्र का ठहराव
हरित हो उठती
पतझड़ की डालियाँ
लघु चिंतन में
सिमट जाता
पूरा स्वरूप
बन जाता
फिर......
एक रेत का महल
खुशियों का लबादा ओढ़े
दस्तक देता प्रलय
ढेर बन गए महल में
दब जाती
वो गूंज
रत्नों पर फन फैलाए
समय का नाग
डस लेता
देता एक सुलगता ज़ख्म
रिसता है जो
शाम ढले
उस चौखट को देखकर..........!!

सुमन 'मीत'

http://arpitsuman.blogspot.com/

http://sumanmeet.blogspot.com/

18 comments:

  1. बहुत बढ़िया प्रस्तुति ....

    भाषा का सवाल सत्ता के साथ बदलता है.अंग्रेज़ी के साथ सत्ता की मौजूदगी हमेशा से रही है. उसे सुनाई ही अंग्रेज़ी पड़ती है और सत्ता चलाने के लिए उसे ज़रुरत भी अंग्रेज़ी की ही पड़ती है,
    हिंदी दिवस की शुभ कामनाएं

    एक बार इसे जरुर पढ़े, आपको पसंद आएगा :-
    (प्यारी सीता, मैं यहाँ खुश हूँ, आशा है तू भी ठीक होगी .....)
    http://thodamuskurakardekho.blogspot.com/2010/09/blog-post_14.html

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  2. बढ़िया प्रस्तुति ..
    हिंदी दिवस पर हार्दिक बधाई और ढेरों शुभकामनाये....
    जय हिंद जय हिंदी

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  3. भावपूर्ण अभिव्‍यक्ति। पर कविता के अगर पद अलग अलग करके दिए जाते तो पाठक को पढ़ने में और ग्रहण करने में आसानी होती।

    एक और निवेदन कि कम से कम एक रचना तीन दिन तो वटवृक्ष पर रहे। परसों हमने ज्‍योत्‍सना जी को पढ़ा था,कल सुभाष जी को और आज सुमन जी। समय थोड़ा कम लगता है। संभव हो तो विचार करें।

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  4. बेहद गहन भाव भरे हैं।

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  5. shaandar kavita
    bhavon se otu-prot

    pathak man prasnn hua

    lirpya yaha bhi najre inayat kare
    http:\\mere-ehsaas.blogspot.com

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  6. भावपूर्ण अभिव्‍यक्ति।

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  7. रचनाएँ तो अपनी जगह पर हैं ही और जब इसको रूप देना है प्रकाशन का तो लंबा समय श्रेयेस्केर नहीं होगा.........ऊपर में सारी रचनाओं का मुख्य विम्ब
    आता है सुविधा के लिए

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  8. बहुत बढ़िया प्रस्तुति ..
    हिंदी दिवस पर हार्दिक शुभकामनाये....

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  9. बढ़िया प्रस्तुति ..
    हिंदी दिवस पर हार्दिक बधाई और ढेरों शुभकामनाये....

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  10. समय ही बनाता और बिगाड़ता और दे जाता है एक जख्म ....!

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  11. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति.

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  12. bahut sunder........ sabhi ko hindi diwas kee shubhkamnayen,

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  13. प्रशंसनीय अभिव्यक्ति!
    गहन भाव....

    शुभकामनाएं....

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  14. अति सुन्दर!






    हिन्दी के प्रचार, प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है. हिन्दी दिवस पर आपका हार्दिक अभिनन्दन एवं साधुवाद!!

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  15. बन्द हैं चौखट के उस पार
    अतीत की कोठरी में
    पलों के रत्न जड़ित
    आभूषण
    एक दबी सी आहट
    सुनाती
    एक दीर्घ गूंज
    समय चलता
    अपनी उलटी चाल
    घिरता कल्पनाओं का लोक
    लम्हों को परिचालित करता
    अपने अक्ष पर

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  16. बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

    आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

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